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जिनके पास डीडीए के छोटे-छोटे दो प्लॉट हैं लेकिन वे दोनों को मिलाकर घर नहीं बना पा रहे हैं, उन्हें थोड़ा इंतजार करना होगा। डीडीए मास्टर प्लान में बदलाव कर इस प्रस्ताव को जोड़ने की तैयारी में है ताकि नक्शा पास हो जाए। यानी अगर कोई दो प्लॉट को मिलाकर घर बनाना चाहता है तो उसी तरह के नक्शे को पास किया जाए। अभी ऐसा प्रावधान न होने से हजारों लोगों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है।

नियम के मुताबिक दो रेजिडेंशल प्लॉट का नक्शा एकसाथ पास नहीं हो सकता। अलग-अलग प्लॉट के लिए अलग-अलग नक्शा बनाना होगा ना कि दोनों को मिलाकर। करीब ढाई साल पहले एमसीडी ने तीन महीनों के लिए जॉइंट नक्शे पास किए थे। उस वक्त एमसीडी ने करीब 40 प्लॉट का नक्शा पास किया था जो दो प्लॉट को मिलाकर बनाए गए थे। तीन महीने बाद इसे बंद कर दिया गया। उस वक्त जिन लोगों ने इस उम्मीद के साथ अपने प्लॉट के साथ वाला प्लॉट भी खरीदा था कि वह घर बना लेंगे वह तब से आज तक इंतजार ही कर रहे हैं। ऐसे लोगों की संख्या सबसे ज्यादा रोहिणी में है। यहां डीडीए ने 26 मीटर, 32 मीटर, 48 मीटर और 60 मीटर के प्लॉट दिए हैं। जिन लोगों के पास यह प्लॉट हैं उनका सिर्फ एक प्लॉट में घर बनाकर गुजारा नहीं हो सकता।

प्लॉट मालिक राम अग्रवाल ने बताया कि मेरा 32 मीटर का प्लॉट है। जिस वक्त एमसीडी ने दो प्लॉट का एक साथ नक्शा पास करना शुरू किया था उस वक्त मैंने अपने प्लॉट से लगा दूसरा प्लॉट भी ले लिया था ताकि मिलाकर इतना बड़ा घर बन जाए जिसमें पूरी फैमिली साथ रह सकें। लेकिन एमसीडी ने फिर नक्शा पास करना बंद कर दिया। उस दौरान कई लोगों ने दो प्लॉट मिलाकर घर बना लिए। रोहिणी में ही करीब 25000 ऐसे घर बनाए गए हैं। अब नियम के मुताबिक वह अवैध हो गए हैं। उन्हें डर लगा रहता है कि कहीं कोई कार्रवाई न हो जाए।

पिछले दिनों डीडीए अफसरों के साथ मीटिंग में लोगों ने अपनी मांग रखी और कहा कि दो प्लॉट का एकसाथ नक्शा पास होना चाहिए। डीडीए वाइस चेयरमैन ने भरोसा दिलाया कि मास्टर प्लान में बदलाव किया जाएगा। इन दिनों मास्टर प्लान का रिव्यू चल रहा है और कई लोगों ने इस संबंध में अपने सुझाव दिए हैं। डीडीए अधिकारी ने बताया कि मास्टर प्लान में चेंज कर इस प्रावधान को डाला जा सकता है कि जहां छोटे प्लॉट हैं वहां दो प्लॉट का एकसाथ नक्शा पास करने की इजाजत दी जाए। इससे हजारों लोगों को फायदा होगा।